सांख्यिकी एक विषय के रूप में Statistics as a Subject

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Saurabh Guptahttp://karekaise.in
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Meaning and Definition of Statistics  / सांख्यिकी का अर्थ एवं परिभाषा


सांख्यिकी को एक स्वतन्त्र विज्ञान के रूप में जन्म देने का श्रेय जर्मनी के प्रो. गॉटफ्राइड आकेनवाल को प्राप्त है। सांख्यिकी का शाब्दिक अर्थ संख्या से सम्बन्धित विज्ञान से होता है। अन्य शब्दों में, इसका आशय संख्यात्मक तथ्यों के ज्ञान से होता है। अंग्रेजी भाषा का स्टैटिस्टिक्स (Statistics) लैटिन भाषा के स्टेट्स (Status) इटैलियन भाषा के स्टैटिस्टा (Statista) तथा जर्मन भाषा के स्टेटिस्टिक (Statistik) शब्दों आदि से बना माना जाता है। इन तीनों भाषाओं के शब्दों का अर्थ राज्य विज्ञान से होता है। वास्तव में सांख्यिकी का प्रारम्भ राज्य विज्ञान के रूप में ही हुआ है। प्राचीनकाल से ही इसका उपयोग शासन प्रबन्ध को सुचारू रूप से चलाने के लिये किया जाता रहा है। इस प्रकार सांख्यिकी विज्ञान एक अत्यन्त प्राचीन शास्त्र है। सांख्यिकी भी अनेक शब्दों की भाँति बहुअर्थी शब्द माना जाता है तथा इसकी परिभाषा के सम्बन्ध में मतभेद पाया जाता है। फिर भी अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इसकी परिभाषाओं को निम्न दो भागों में बाँटा जा सकता है (क) बहुवचन या समंक के रूप में (In the Form of Plural or Data) इस श्रेणी में सांख्यिकी की वे मस्त परिभाषायें आती हैं जिनमें समंकों के संग्रहण एवं निर्वाचन से सम्बन्धित बातों का अध्ययन किया जाता है। इसके अन्तर्गत सांख्यिकीय विधियों एवं सिद्धान्तों का अध्ययन किया जाता है। संक्षेप में, बहुवचन के रूप में इसका उपयोग समंकों के रूप में होता है। बहुवचन के रूप में सांख्यिकी की कुछ विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषायें निम्न प्रकार हैं

सांख्यिकी की परिभाषा

(1) डॉ. ए. एल. बाउले (Dr. A.L. Bowley) के अनुसार, “सांख्यिकी का आशय अनुसन्धान के किसी विभाग में संख्यात्मक तथ्यों के समूह से है जो एक-दूसरे से सम्बन्धित रूप से प्रस्तुत किये जाते हैं।

(2) एल. आर. कॉनर (L. R. Connor) के अनुसार, “समंक किसी प्राकृतिक अथवा सामाजिक घटना की माप, गणना अथवा अनुमान है, जो क्रमबद्ध रूप में व्यवस्थित किये जाते है जिससे उनके पारस्परिक सम्बन्धों को दर्शाया जा सके।”

(3) होरिस सेक्राइस्ट (Horace Secrist) के अनुसार, “सांख्यिकी उन तथ्यों के योग को कहते हैं जो अनेक कारणों से पर्याप्त मात्रा में प्रभावित होते हैं जो संख्या में व्यक्त किये जाते हैं जिनकी गणना या अनुमान शुद्धता के एक उचित स्तर के अनुसार किया जाता है तथा जिन्हें किसी पूर्व निश्चित उद्देश्य के लिये क्रमबद्ध ढंग से संगृहीत किया जाता है और जो एक-दूसरे के सम्बन्ध में उपस्थित किये जाते हैं।”

(ख) एकवचन या विज्ञान के रूप में (In the Form of Singular or Science)

एकवचन के रूप में सांख्यिकी का आशय सांख्यिकीय विज्ञान से होता है। तकनीकी दृष्टि से इसे विश्लेषणात्मक सांख्यिकी भी कहा जाता है। एक वचन के रूप में सांख्यिकी की कुछ विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषायें निम्न है-

(1) डॉ. ए. एल. बाउले (Dr. A. L. Bowley) ने सांख्यिकी की परिभाषा विज्ञान के रूप में निम्न प्रकार दी है-

“सांख्यिकी गणना का विज्ञान है।”

“सांख्यिकी उचित रूप से माध्यों का विज्ञान कहा जा सकता है।”

“सांख्यिकी सामाजिक व्यवस्था को पूर्ण मानकर सभी दृष्टिकोणों से उसके माप का विज्ञान है।”

(2) बार्डिगटन (Boddington) के अनुसार, “सांख्यिकी अनुमानों तथा सम्भावनाओं का विज्ञान है।”

(3) क्रॉक्सटन एवं काउंडेन (Croxton and Cowden) के अनुसार, “संख्यात्मक तथ्यों के संकलन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और निर्वाचन को सांख्यिकी कहा जा सकता है।”

उपरोक्त परिभाषाओं के अध्ययन से स्पष्ट है कि सांख्यिकी अनेक रीतियों तथा सिद्धान्तों का समूह है जिसके आधार पर उचित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। वर्तमान काल में आंकड़ों का संकलन, वर्गीकरण, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण एवं निर्वाचन अनेक समस्याओं के समाधान के लिये किया जाता है।

Statistics is the Science of Estimates and Probabilities / सांख्यिकी अनुमानों एवं सम्भावनाओं का विज्ञान है


प्रस्तुत कथन बॉडिंगटन (Boddington) द्वारा दिया गया है। इस कथन से दो बातें स्पष्ट होती हैं—प्रथम ये एक विज्ञान है तथा द्वितीय, जिसमें अनुमान एवं सम्भावनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अतः उन्होंने इस कथन द्वारा यह स्पष्ट किया कि अनुसंधान के बड़े क्षेत्रों में अनुमानों एवं सम्भावनाओं द्वारा ही आँकड़े एकत्रित किये जाते हैं। यह सच है कि सांख्यिकी विज्ञान में बड़ी संख्याओं की आवश्यकता पड़ती है जिनकी गणना असम्भव है। अतः ऐसे आँकड़े केवल अनुमान द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं तथा भावी आँकड़ों को भी अनुमानित किया जाता है, किन्तु ये अनुमान लगाने के लिए विभिन्न प्रकार की गणनाओं की आवश्यकता होती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि केवल अनुमानों और सम्भावनाओं से ही सांख्यिकी का क्षेत्र पूरा नहीं हो जाता है, यह तो सांख्यिकी की विभिन्न रीतियों में मात्र एक विधि है। अतः सांख्यिकी को केवल अनुमान एवं सम्भावनाओं का विज्ञान कहना उचित नहीं है।

Scope of Statistics / सांख्यिकी का क्षेत्र


आज सांख्यिकी का क्षेत्र काफी व्यापक बन गया है। सांख्यिकी के क्षेत्र के अन्तर्गत निम्न बातों को शामिल किया जाता है

सांख्यिकी के क्षेत्र

(I) सांख्यिकी रीतियाँ (Statistical Mothods)– ये वे रीतियाँ हैं जिनका प्रयोग आँकड़ों के संकलन, विश्लेषण एवं निर्वाचन में किया जाता है। इनके द्वारा तथ्यों को सरल व सुगम बनाया जाता है ताकि आधारभूत सत्यें को प्रकट किया जाता सके। यूल और केण्डाल (Yule and Kendall) के शब्दों में “सांख्यिकी रीतियों से हमारा तात्पर्य उन रीतियों से है जिनका प्रयोग अनेक कारणों से प्रभावित समकों की व्याख्या करने के लिए किया जाता है।” सांख्यिकीय रीतियों के सम्बन्ध में जॉन्सन एवं जैक्सन कहते हैं कि “सांख्यिकीय रीतियाँ वे प्रक्रियायें हैं, जो संख्यात्मक तथ्यों के संग्रहण, संगठन, संक्षिप्तीकरण, विश्लेषण प्रस्तुतीकरण एवं निर्वाचन में प्रयोग की जाती है। अतः सांख्यिकीय रीतियों के अन्तर्गत निम्न कार्यों को सम्मिलित किया जाता है –

(1) समकों का संग्रहण (Collection of Data)—ये वे रीतियाँ हैं, जिनको सांख्यिकीय अनुसंधान का आयोजन करने के बाद समंकों को एकत्रित करने के विषय में प्रयुक्त किया जाता है। संकलित समकों के सम्पादन का कार्य भी इसमें सम्मिलित होता है।

(2) वर्गीकरण (Classification) संकलित समंकों को सरल एवं बोधगम्य एवं तुलना योग्य बनाने के लिए उन्हें गुण विशेष के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जिससे समको की प्रकृति को सरलता से समझा जा सके।

(3) समकों का प्रस्तुतीकरण (Presentation of Data) समकों के उपयोग के लिए। उनका उचित रूप से प्रस्तुतीकरण किया जाता है। प्रस्तुतीकरण की तीन विधियाँ है—(1) सांख्यिकीय सारणी, (2) चित्र तथा (3) रेखाचित्र अथवा विन्दुरेत्रीय चित्र एकत्रित समंकों को अधिक तुलनीय बनाने के लिए उनका सारणीयन किया जाता है। मस्तिष्क पर उनकी अमिट छाप छोड़ने के लिए उन्हें बिन्दु रेखाओं पर चित्रों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

(4) समकों का विश्लेषण (Analysis of Data) प्रस्तुत समकों का विभिन्न विधियों द्वारा विश्लेषण किया जाता है और उनकी महत्वपूर्ण विशेषताएँ ज्ञात कर ली जाती हैं। ये विभिन्न विधियाँ है-केन्द्रीय प्रवृत्ति का मापन, अपकिरण, विषमता, सह-सम्बन्ध, सूचकांक रचना, काल श्रेणी का विश्लेषण अन्तरगणन तथा बाह्यगणन।

(5) निर्वाचन (Interpretation) समकों के विश्लेषण द्वारा प्राप्त निष्कर्षों का सांख्यिकीय रीतियों द्वारा तुलना कर निर्वाचन किया जाता है। अर्थात् उचित एवं विवेकपूर्ण निर्णय लिये जाते हैं।

(6) पूर्वानुमान (Forecasting) – सांख्यिकीय रीतियों के माध्यम से वर्तमान एवं भूतकालीन समकों के विश्लेषण से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर भविष्य के लिए पूर्वानुमान लगाये जाते हैं।

(II) व्यावहारिक सांख्यिकी (Applied Statistics)– सांख्यिकी रीतियों हमें सिद्धान्त का ज्ञान कराती है जबकि व्यावहारिक सांख्यिकी में उन सिद्धान्तों या रीतियों को व्यवहार में कैसे लाया जाये, का अध्ययन किया जाता है। किसी अनुसन्धान से सम्बन्धित अंकों का किस प्रकार संग्रहण, विश्लेषण प्रदर्शन व निर्वाचन किया जाये, यह व्यावहारिक सांख्यिकी का क्षेत्र है। व्यावहारिक साख्यिकी के दो भाग किये जा सकते हैं-(1) वर्णनात्मक व्यावहारिक सांख्यिकी (Descripted Applied Statistics) तथा (2) वैज्ञानिक व्यावहारिक सांख्यिकी (Scientific Applied Statistics) |

प्रथम के अन्तर्गत भूत तथा वर्तमान काल में एकत्रित समंकों का अध्ययन किया जाता है जबकि द्वितीय संकलन के उद्देश्य से एकत्रित किया जाता है और उसकी सहायता से कुछ सिद्धांतों के प्रतिपादन का प्रयत्न किया जाता है।

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