Descriptive statistics विवरणात्मक सांख्यिकी क्या है

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Saurabh Guptahttp://karekaise.in
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Meaning of Descriptive Statistics / विवरणात्मक सांख्यिकी का अर्थ


Descriptive Statistics का आशय किसी सामाजिक समस्या से सम्बन्धित वास्तविक तथ्यों के आधार पर वर्णनात्मक विवरण प्रस्तुत करने से है ताकि उसका निदान सरलतापूर्वक खोजा जा सके। दूसरे शब्दों में, विवरणात्मक सांख्यिकी में उन सांख्यिकीय रीतियों का अध्ययन किया जाता है, जिनका प्रयोग सूचनाओं को अर्थपूर्ण बनाने एवं उनका विवरण देने के लिए किया जाता है। विवरणात्मक सांख्यिकी की प्रमुख विशेषता किसी सामाजिक समस्या से सम्बन्धित पूर्ण एवं यथार्थ सूचनाएँ प्रदान करना है। अतः ये अध्ययन किसी समुदाय या समूह के सम्पूर्ण जीवन से सम्बन्धित प्रक्रियाओं के होते हैं। इन सम्पूर्ण सामाजिक प्रक्रियाओं का वर्णन वैज्ञानिक विधि की सहायता से किया जाता है। विवरणात्मक सांख्यिकी का सम्बन्ध निम्न दो प्रकार की समस्याओं से होता है

Descriptive Statistics

(1) किसी सामाजिक समस्या से सम्बन्धित सामान्य नियमों की खोज करना।

(2) समस्या को हल करने हेतु विशिष्ट परिस्थितियों में निदान खोजना । इस प्रकार स्पष्ट है कि Descriptive Statistics या वर्णनात्मक सांख्यिकी के लिए यह आवश्यक होता है कि किसी सामाजिक विषय के सम्बन्ध में पूर्ण एवं यथार्थ सूचनाएँ एकत्र की जाएँ। ये सूचनाएँ वैज्ञानिक ढंग से प्राप्त की जाती हैं और इनका आधार वास्तविक एवं विश्वसनीय तथ्य है। इस प्रकार स्पष्ट है कि Descriptive Statistics के माध्यम से संख्यात्मक तथ्यों की मौलिक विशेषताओं को प्रदर्शित किया जाता है।

Objects of descriptive statistics / विवरणात्मक सांख्यिकी के उद्देश्य


विवरणात्मक अनुसंधान प्ररचना की भी कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य है। संक्षेप में इन उद्देश्यों को अग्रलिखित तीन वर्गों में व्यक्त किया जा सकता है –

Descriptive Statistics objects

(1)समूह अथवा परिस्थिति के लक्षणों का परिशुद्ध वर्णन – विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना में हम किसी समूह जैसे कोई राजनीतिक दल अथवा किसी परिस्थिति जैसे हड़ताल या चुनाव आदि का परिशुद्ध वर्णन करते हैं एवं क्रमवार विस्तृत ज्ञान प्राप्त करते हैं। यह ज्ञान गुणात्मक एवं संख्यात्मक दोनों ही प्रकार का हो सकता है। जैसे गुणात्मक ज्ञान से हमें यह पता लगता है कि किस चुनाव के उम्मीदवार किस-किस राजनीतिक दल के ये अथवा वे किस-किस जाति के थे ? संख्यात्मक ज्ञान संख्या पर आधारित होता है। यह सामान्यतः किसी घर की आवृत्ति होती है। जैसे किसी चुनाव में कितने लोगों ने भाग लिया।

(2) किसी घर की आवृत्ति निश्चित करना-विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना से अध्ययन करते समय हमें विषय या समस्या का कुछ ज्ञान रहता है। यह ज्ञान पहले किए हुए अन्वेषणात्मक या दूसरे लोगों के अध्ययनों द्वारा प्राप्त होता है। इसलिए वर्णनात्मक अध्ययन के उद्देश्य सुस्पष्ट होते हैं। जैसे यह निश्चित रहता है कि हमें किन लक्षणों का वर्णन करना है। समस्त लक्षणों का वर्णन किसी एक अध्ययन से नहीं होता है। जैसे किसी संस्था के विभिन्न भागों का आकार एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है किन्तु यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक अध्ययन में इसका समावेश हो। इसी प्रकार किन चरों की आवृत्ति देखनी है यह तय होता है।

(3) चरों के साहचर्य के विषय में पता लगाना–विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना का एक और उद्देश्य यह है कि इसके द्वारा चरों के साहचर्य के विषय में पता लगाया जाता है। जैसे पिछड़े देशों में आय और शिक्षा में धनात्मक साहचर्य पाया जाता है अर्थात् अमीर व्यक्ति सामान्यतः अधिक शिक्षित होते हैं। विवरणात्मक अनुसन्धान प्ररचना में हम किसी प्रकार विभिन्न चरों के साहचर्य का पता लगाते हैं अर्थात यह देखते हैं कि साहचर्य है या नहीं और नि यदि है तो इस प्रकार का यहाँ यह ध्यान रखने योग्य बात है कि समस्त चरों का एक-दूसरे के साथ साहचर्य हम नहीं देखते। हम केवल उन चरों का साहचर्य देखते हैं जहाँ हम इनकी आशा करते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विवरणात्मक प्ररचना विवरणात्मक उपकल्पनाओं की परीक्षा करना है। इस प्रकार की उपकल्पनाओं का परीक्षण एक अधिक विकसित प्ररचना द्वारा होता है। वर्णनात्मक अध्ययन द्वारा केवल इन उपकल्पनाओं का निर्माण होता है। जैसे यदि हम किन्हीं घरों में बहुत अधिक साहचर्य पाएँ तो हम यह उपकल्पना बना सकते हैं कि उनमें से एक कारण है और दूसरा नहीं।

Steps of descriptive statistics / विवरणात्मक सांख्यिकी के चरण


वर्णनात्मक अनुसन्धान रचना को किस तरह आयोजित किया जाए इसके कुछ आवश्यक चरण भी हैं। प्रमुख चरण निम्नांकित हैं

Descriptive Statistics steps

(1) अनुसन्धान उद्देश्यों का निरूपण

(2) तथ्य संकलन एवं पद्धतियों का

(3) निदर्शन का चयन।

(4) आधार सामग्री का संकलन एवं परीक्षण।

(5) परिणामों का विश्लेषण करना।

(6) प्रतिवेदन प्रस्तुत करना।

इन समस्त चरणों से सफलतापूर्वक गुजरने के साथ ही Descriptive Statistics या वर्णनात्मक अनुसन्धान प्ररचना के उद्देश्यों की प्राप्ति सम्भव है।

Statistical Methods of Descriptive Statistics / विवरणात्मक सांख्यिकी की सांख्यिकीय रीतियाँ


Descriptive Statistics के अन्तर्गत आने वाली सांख्यिकीय रीतियाँ निम्न प्रकार हैं

(1) समकों का संग्रहण (Collection of Data)- सांख्यिकीय विधियों द्वारा ज्ञान की खोज करना सांख्यिकीय अनुसन्धान कहा जाता है। सांख्यिकीय अनुसन्धान का उद्देश्य सुव्यवस्थित तथा वैज्ञानिक पद्धति से सांख्यिकीय रीतियों का उपयोग करते हुए सम्बन्धित समंकों को संकलित करना तथा उनके आधार पर निष्कर्ष निकालना है। समंकों का संकलन सांख्यिकीय अनुसन्धान का एक प्रमुख चरण है। समकों का संकलन सम्पूर्ण अनुसन्धान अथवा प्रतिदर्श अनुसन्धान के रूप में किया जा सकता है।

(2) समकों का व्यवस्थीकरण (Organisation of Data Editing)- समकों के व्यवस्थीकरण में सर्मकों का सम्पादन, वर्गीकरण, सारणीयन आदि का अध्ययन किया जाता है। सम्पादन का मुख्य उद्देश्य सम्भावित त्रुटियाँ और अनियमितताओं का पता लगाना व उन्हें दूर करना है।

(3) वर्गीकरण एवं सारणीयन (Classification and Tabulation) —संकलित समको को अधिक सरल एवं तुलना योग्य बनाने के लिए किसी गुण-विशेष के आधार पर विभिन्न वर्गों में बाँटना वर्गीकरण कहलाता है। वर्गीकृत समकों को सारणी रूप में रखना सारणीयन कहा जाता है।

(4) प्रस्तुतीकरण (Presentation)-समंकों में प्रस्तुतीकरण में प्रायः तीन सांख्यिकीय रीतियाँ आती है-सांख्यिकीय सारणियाँ, चित्र (diagram) तथा बिन्दुरेखीय चित्र (graph)। चित्र एवं ग्राफ द्वारा प्रस्तुत समंक मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ते हैं।

(5) विश्लेषण (Analysis)–समकों के विश्लेषण की प्रमुख उल्लेखनीय रीतियाँ (i)केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (माध्य), (ii) अपकिरण, विषमता, पृथुशीर्षत्व आदि के माप, (iii) सहसम्बन्ध प्रतीपगमन, काल श्रेणी, सूचकांक आदि की गणना एवं मापन आदि हैं। (6) निर्वाचन (Interpretation) समंकों का विश्लेषण करने के पश्चात् उचित, निष्पक्ष और बुद्धिमत्तापूर्ण निष्कर्ष निकाले जाते हैं। निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया को समंकों का निर्वचन (interpretation of data) कहा जाता है।

Characteristic of descriptive statistics / विवरणात्मक सांख्यिकी की विशेषता


1. दृष्टिकोण

यह सांख्यिकी के प्राचीन एवं परम्परावादी दृष्टिकोण का मुख्य पहलू है।

2.रीतियाँ

इसमें प्रयुक्त रीतियों समंकों का संकलन, व्यवस्था, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण, एवं निर्वचन हैं।

3.उद्देश्य

Descriptive Statistics का उद्देश्य प्राप्त समंकों की विशेषताओं का  विवरण प्रस्तुत करना है।

4. अनिश्चितता एवं जोखिम

Descriptive Statistics में अनिश्चितता एवं जोखिम का तत्व नहीं होता है।

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