Questionnaire का अर्थ एवं परिभाषा और इसके प्रकार

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Saurabh Guptahttp://karekaise.in
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आज आप इस आर्टिकल में जानेंगे कि questionnaire क्या होता है और इसके प्रकार आज हम ये भी जानेंगे की किस तरह questionnaire , schedule से भिन्न है हम ये जानेंगे की एक आदर्श प्रश्नावली के गुण क्या है तो चलिए मैं आपको विस्तार से बताता हूं कि ये क्या होता है।

Meaning and Definition of Questionnaire /प्रश्नावली का अर्थ एवं परिभाषा


Questionnaire का प्रमुख उद्देश्य अध्ययन विषय से सम्बन्धित प्राथमिक तथ्य सामग्री एकत्र करना होता है। प्रश्नावली से आशय उस व्यवस्थित तालिका से है जो विषय के सन्दर्भ में सूचनाएँ प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करती है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सर्वेक्षणों में तथ्यात्मक जानकारी ज्ञात करने में प्रश्नावली का योगदान अति महत्वपूर्ण है।

Questionnaire

सामान्य तौर पर किसी विषय से सम्बन्धित व्यक्तियों से सूचना प्राप्त करने के लिये बनायी गयी सुव्यवस्थित प्रश्नों की सूची को प्रश्नावली  की संज्ञा दी जाती है।

बोगार्डस के अनुसार, “प्रश्नावली विभिन्न व्यक्तियों को उत्तर देने के लिए दी गई प्रश्नों की एक तालिका है।

” गुडे तथा हॉट के अनुसार, “सामान्य रूप से प्रश्नावली शब्द प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने की उस प्रणाली को कहते हैं, जिसमें स्वयं उत्तरदाता के द्वारा भरे जाने वाले पत्रक ( Form)का प्रयोग किया जाता है।

इस प्रकार प्रश्नावली विभिन्न प्रश्नों की एक ऐसी व्यवस्थित सूची है जिसका उद्देश्य किसी विषय से सम्बन्धित समस्या के लिए व्यक्तियों से डाक द्वारा सूचनाएँ प्राप्त करना है। दूसरे शब्दों में समंकों को संकलित करने की वह विधि है जिसमें संकलनकर्ता प्रश्नों के आगे छोड़ी गयी खाली जगह में ही उसके उत्तर को हाँ या नहीं में पूछता है, उसे questionnaire कहते हैं।

Types of Questionnaire / प्रश्नावली के प्रकार


विद्वानों द्वारा बताये गये प्रश्नावली के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं –

Questionnaire types

(1) तथ्य सम्बन्धी प्रश्नावली – यह प्रश्नावली सामाजिक तथ्यों को एकत्र करने में उपयोग में ली जाती है।

(2) मत तथा मनोवृत्ति सम्बन्धी प्रश्नावली – यह उत्तरदाता की अभिरुचि से सम्बन्धित सूचनाओं को प्राप्त करने के उपयोग में आती है।

(3) संरचित प्रश्नावली – इस प्रकार की प्रश्नावली की रचना अनुसंधान प्रारम्भ करने के पूर्व ही कर ली जाती है।

(4) असंरचित प्रश्नावली – इसके अन्तर्गत प्रश्नों को पहले से नहीं बनाया जाता है बल्कि मात्र अध्ययन, विषय, क्षेत्र आदि के सम्बन्ध में उल्लेख किया जाता है।

(5) खुली प्रश्नावली – जिन प्रश्नावलियों में उत्तरदाताओं को अपना उत्तर व्यक्त करने में पूर्ण स्वतन्त्रता हो, उसे खुली प्रश्नावली कहते हैं। इसमें वह अपनी स्वेच्छा से उत्तर दे सकता है। उस पर किसी प्रकार का बन्धन नहीं लगाया जाता है।

(6) चित्रमय प्रश्नावली – इस तरह की प्रश्नावली में प्रश्नों के उत्तर चित्रों द्वारा प्रदर्शित किये जाते हैं। उत्तरदाता के समक्ष अलग-अलग चित्र होते हैं जिनके आगे लिखा होता है कि क्या आप छोटे परिवार को पसन्द करते हैं या बड़े परिवार को ? इसमें चित्रों द्वारा छोटे एवं बड़े परिवार बताये जाते हैं। उत्तरदाता को अपनी पसन्द के अनुसार सिर्फ उस पर निशान लगाना होता है। यह प्रश्नावली विशेष रूप से कम पढ़े-लिखे लोगों तथा बच्चों के लिए अधिक उपयोगी होती है।

Essentials of an Ideal Questionnaire / एक आदर्श प्रश्नावली के गुण


सांख्यिकी अनुसंधान की सफलता प्रश्नावली की श्रेष्ठता पर निर्भर करती है। अतः एक आदर्श प्रश्नावली तैयार करते समय निम्नलिखित दातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए –

(1) प्रश्नों की संख्या कम (Fewer Questions)–प्रश्नावली में प्रश्नों की संख्या कम होनी चाहिए। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रश्न इतने कम न हो जाएँ कि पर्याप्त सूचना ही प्राप्त न हो सके।

(2) सरल व स्पष्ट प्रश्न (Simple and Clear Questions) – प्रश्न सरल, स्पष्ट व सूक्ष्म होने चाहिए। अधिकांश प्रश्न ऐसे होने चाहिए जिनका उत्तर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में दिया जा सके प्रश्नों में अप्रचलित, जटिल व असम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

(3) उचित क्रम (Logical Sequence) – प्रश्न प्राथमिकता अथवा महत्व के क्रम में रखे जाने चाहिए। परस्पर सम्बन्धित प्रश्नों को एक ही स्थान पर केन्द्रित किया जाना चाहिए;जैसे-

(i) क्या आप विवाहित हैं ?

(ii) यदि हाँ तो आपके कितने बच्चे हैं?

(4) वर्जित प्रश्न (Prohibited Questions)- प्रश्नावली में ऐसे प्रश्न सम्मिलित नहीं किए जाने चाहिए जिनसे सूचक के आत्मसम्मान तथा सामाजिक व धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे, जो उनके मन में सन्देह, उत्तेजना या विरोध उत्पन्न करे अथवा जो उसके व्यक्तिगत व्यवहार से सम्बन्धित हों; जैसे-

(i) “क्या आप किसी एड्स से पीड़ित हैं ?”

(ii) “क्या आप साम्प्रदायिक भावना से पीड़ित हैं ?”

(iii) “क्या आपका प्रेम पत्नी के अतिरिक्त किसी और स्त्री से भी है ? आदि ?”

(5) सत्यता की जाँच (Cross-examination)–प्रश्नावली में ऐसे प्रश्नों का भी समावेश होना चाहिए जिससे उत्तरों की यथार्थता की परस्पर जाँच की जा सके।

(6) प्रश्नों में उचित शब्दों का प्रयोग (Use of Proper Words in Questions ) – प्रश्नों के गठन में सही स्थान पर सही शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्रश्न ऐसे होने चाहिए जिनके अर्थ प्रमाणित एवं सर्वविदित हो।

(7) प्रत्यक्ष सम्बन्ध (Directly Related) – प्रश्न अनुसंधान से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होने चाहिए ताकि व्यर्थ की सूचना एकत्र करने में धन, श्रम व समय का अपव्यय न हो।

(8) सूचक की योग्यता के अनुसार प्रश्न (Questions According to Knowledge of the Informant)-प्रश्नावली में ऐसे प्रश्न होने चाहिए जिनके उत्तर सरलता से दे दें।

(9) आवश्यक निर्देश (Necessary Instructions)- प्रश्नावली भरने के सम्बन्ध में प्रश्नावली के प्रारम्भ में अथवा अन्त में स्पष्ट रूप से आवश्यक निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि सूचक को सूचना देने में आसानी हो।

(10) पूर्व परीक्षण एवं संशोधन (Pre-testing and Rectification)– प्रश्नावली के तैयार हो जाने पर, अनुसंधान कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व उसका कुछ लोगों पर परीक्षण कर लेना चाहिए। इससे प्रश्नावली के दोषों को दूर करने में सहायता मिलेगी।

Distinction between Schedule and Questionnaire / प्रश्नावली तथा अनुसूची में अन्तर


प्रश्नावली (Questionnaire):

1. इसमें उत्तर स्वयं सूचना देने वाले को ही लिखने पड़ते हैं।

2. प्रश्नावली में प्रश्नों का उत्तर पृथक् से प्राप्त करने की व्यवस्था रहती है।

3. हमें सूचनाएँ केवल शिक्षित व्यक्तियों से ही प्राप्त की जा सकती हैं।

4. उत्तरदाता को प्रगणक प्रभावित नहीं कर सकता है, क्योंकि इसे डाक द्वारा भेजा जाता है।

5. इसमें समय एवं श्रम दोनों की बचत होती है, परन्तु डाक व्यय के रूप में खर्च अधिक लगता है।

6. इसका प्रयोग विस्तृत क्षेत्र के अनुसंधान कार्य में किया जाता है।

अनुसूची ( Schedule):

1. इसमें उत्तर अनुसंधानकर्ता या प्रगणक द्वारा लिखे जाते हैं।

2. अनुसूची में प्रायः उत्तरों के लिये आगे स्थान छोड़ दिया जाता है।

3. इसमें सूचनाएँ शिक्षित एवं अशिक्षित सभी व्यक्तियों से प्राप्त की जा सकती हैं।

4. उत्तरदाता से प्रत्यक्ष सम्पर्क होने के कारण प्रगणक उसे प्रभावित कर सकता है।

5. इसमें समय एवं श्रम दोनों ही अधिक लगते हैं, परन्तु डाक व्यय की बचत होती है।

6. यह प्रयोग ऐसे अनुसंधान कार्य में किया जाता है, जहाँ क्षेत्र सीमित हो।

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