Statistics सांख्यिकी का महत्व एवं स्वभाव एवं सीमाएं और इसके कार्य

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Saurabh Guptahttp://karekaise.in
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Nature of Statistics / सांख्यिकी का स्वभाव या प्रकृति


Statistics की प्रकृति का अध्ययन हम दो तथ्यों के आधार पर करते हैं कि सांख्यिकी विज्ञान है अथवा कला अथवा दोनों है। यद्यपि सांख्यिकी के विज्ञान और कला होने के सम्बन्ध में कोई मतभेद नहीं है, किन्तु फिर भी विभिन्न विद्वानों ने इसे अलग-अलग रूपों में अध्ययन किया है। Statistics एक विज्ञान है, क्योंकि विज्ञान की भाँति इसकी विधियों क्रमबद्ध है। इसके नियम अन्य विज्ञान के नियमों की भाँति सुनिश्चित होते हैं तथा वे सभी जगह समान रूप से लागू किये जा सकते हैं। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि कुछ विद्वानों ने सांख्यिकी को विज्ञान न कहकर वैज्ञानिक विधि कहा है। क्रॉक्सटन और कॉउंडेन (Corxton and Cowden) के अनुसार, “सांख्यिकी एक विज्ञान नहीं है, वह एक वैज्ञानिक विधि है।” अर्थात् यह स्वयं में पूर्ण विज्ञान नहीं है, वरन विभिन्न विज्ञानों में सहायता करने वाली महत्त्वपूर्ण विधि है। वैज्ञानिक विधि के चार चरण होते हैं—(1) अवलोकन (2) परिकल्पना (3) पूर्वानुमान तथा (4) परीक्षण इन चारों ही चरणों में सांख्यिकीय रीतियों का व्यापक प्रयोग होता है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि सांख्यिकी विषय भौतिकशास्त्र अथवा रसायनशास्त्र की तरह विज्ञान नहीं है। सांख्यिकी तो ज्ञान प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है, जिसकी विधियों सभी विज्ञानों के अनुसन्धानों में प्रयोग की जाती हैं।

 

Statistics nature

Statistics सिद्धान्तों को व्यवहार में लाना इसके कला के गुण को व्यक्त करता है। कला का अर्थ किसी दिये हुये लक्ष्य या उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कार्य करने की सर्वोत्तम विधि से है। विज्ञान यह बताता है कि समस्या क्या है ? कला यह बताती है कि समस्या हल कैसे की जाये ? इसीलिये यह कहा जाता है कि कला केवल तथ्यों का वर्णन ही नहीं करती, वरन लक्ष्य को प्राप्त करने के उपाय भी बताती है। इस प्रकार कला के रूप में Statistics हमें बताती है कि विभिन्न प्राकृतिक तथा सामाजिक समस्याओं में उत्तम समाधान क्या हो सकता है ? इस दृष्टि से सांख्यिकी निश्चित रूप से कला भी है। उदाहरण के लिए, सांख्यिकीय गुण नियन्त्रण में सांख्यिकीय रीतियों से यही नहीं देखते कि कौन-सा उत्पादन निर्धारित गुण से कम है ? वरन यह भी पता लगाते हैं कि इसके क्या कारण है और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है। इसी प्रकार सह-सम्बन्ध में वर्षा और कृषि उत्पादन में केवल सम्बन्ध ही ज्ञात नहीं किया जाता, वरन यह भी देखा जाता है कि निर्धारित कृषि उत्पादन के लिए कितनी वर्षा होनी चाहिए। स्पष्ट है कि Statistics एक कला भी है।

Statistics की प्रकृति के सम्बन्ध टिप्पेट (Tippett) के यह विचार महत्त्वपूर्ण है, “सांख्यिकी विज्ञान और कला दोनों है। यह विज्ञान है, क्योंकि इसकी रीतियाँ मौलिक रूप से व्यवस्थित हैं तथा उनका सर्वत्र प्रयोग होता है। यह एक कला है, क्योंकि इसकी रीतियों का सफल प्रयोग पर्याप्त सीमा तक सांख्यिकी की योग्यता, अनुभव तथा क्षेत्र विशेष के ज्ञान पर निर्भर करता है।” अतएव यह स्पष्ट है कि सांख्यिकी विज्ञान तथा कला दोनों ही है।

Limitations of Statistics / सांख्यिकी की सीमाएँ


आज के युग में Statistics को एक महत्वपूर्ण विज्ञान माना जाता है, किन्तु दुर्भाग्यवश इस विज्ञान की भी अपनी कुछ सीमायें हैं जिसके कारण कभी-कभी निकलने वाले निष्कर्ष गलत हैं और भ्रमात्मक हो जाते हैं। सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्न है

Statistics limitations

(1) Statistics संख्यात्मक तथ्यों का अध्ययन करती है – सांख्यिकी में केवल ऐसे तथ्यों का ही अध्ययन किया जाता है, जिन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संख्यात्मक रूप में रखा जा सकता है। जिन तथ्यों को किसी भी प्रकार संख्यात्मक रूप में नहीं रखा जा सकता, उनका अध्ययन सांख्यिकी में नहीं किया जाता।

(2) सांख्यिकी व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन नहीं करती – सांख्यिकी में व्यक्तिगत इकाइयों का नहीं, वरन् समूह का अध्ययन किया जाता है। यद्यपि व्यक्तिगत इकाइयों के माध्यम से ही समूह का अध्ययन किया जाता है, किन्तु इसके निष्कर्ष सदैव एक औसत एवं समूह की प्रकृति का आभास प्रकट करते हैं।

(3) बिना सन्दर्भ के सांख्यिकी परिणाम असत्य हो सकते हैं-सांख्यिकीय परिणामों की सत्यता के लिए यह आवश्यक है कि सम्बन्धित समस्या का विधिवत् विश्लेषण एवं अध्ययन किया जाये, क्योंकि सन्दर्भहीन समंकों से प्राप्त होने वाले परिणाम असत्य हो सकते हैं।

(4) सांख्यिकीय नियम औसत रूप में ही सत्य होते हैं-सांख्यिकीय परिणाम शत-प्रतिशत पूर्ण रूप से सत्य नहीं होते, वरन वे सन्निकट प्रवृत्तियों को प्रकट करते हैं।

(5) सांख्यिकी का दुरुपयोग किया जा सकता है-सांख्यिकी का ठीक प्रयोग उसी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जो सांख्यिकी के सिद्धान्तों एवं नियमों का पूर्ण ज्ञान रखता है। ऐसा व्यक्ति जो सांख्यिकी का पूर्ण ज्ञान नहीं रखता, सांख्यिकी द्वारा समकों का दुरुपयोग कर सकता है।

(6) सांख्यिकी केवल साधन मात्र है, समस्या का समाधान नहीं – सांख्यिकी किसी समस्या का विधिवत् विश्लेषण करके उसकी वस्तुस्थिति पर ही प्रकाश डालती है। यह केवल साधन मात्र है, साध्य नहीं।

Importance of Statistics / सांख्यिकी का महत्व


प्राचीनकाल में scope of Statistics अत्यन्त सीमित था। इसका उपयोग केवल शासन प्रबन्ध तक ही सीमित था किन्तु आज इसका उपयोग प्रत्येक क्षेत्र में किया जाने लगा है। यही कारण है कि वर्तमान काल को सांख्यिकी का युग कहा जाता है। इस सम्बन्ध में डॉ. वालिस एवं राबर्टसन (Wallies and Roberts) का कथन ठीक मालूम पड़ता है कि, “सांख्यिकी एक ऐसा साधन है जिसका प्रयोग सिद्ध अनुसन्धान के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान करने में प्रयोग किया जाता है।” कहने का अभिप्राय यह है कि सांख्यिकी का सम्बन्ध जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से होता है। सांख्यिकी का महत्त्व निम्नांकित बातों से स्पष्ट होता है

Statistics importance

1. शासन व्यवस्था में महत्त्व – प्रारम्भ में सांख्यिकी राजाओं का विज्ञान माना जाता था। इसके माध्यम से शासकों को उत्तम भूमि व्यवस्था लगान तथा जनसंख्या सम्बन्धी आंकड़ों को एकत्रित करने में सहायता मिलती थी। आज भी शासन व्यवस्था में इसका उपयोग अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान समय में अधिकतम लोगों का अधिकतम कल्याण की दृष्टि से इसकी उपयोगिता और बढ़ गयी है। यही कारण है कि “साख्यिकी को शासन का नेत्र कहा जाता है।” आज सरकार को विभिन्न दृष्टिकोणों से आंकड़े एकत्रित करने पड़ते हैं। अतएव शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिये समंक अनिवार्य माने जाते हैं।

2. आर्थिक नियोजन में महत्व – आज के आर्थिक नियोजन युग में सांख्यिकी का अत्यन्त महत्व पाया जाता है। विश्व के समस्त देश अपने-अपने आर्थिक विकास की गति को तीव्र करने में व्यस्त हैं। इसके लिये आंकड़ों तथा सांख्यिकी रीतियों का उपयोग किया जाना नितान्त आवश्यक होता है। यह कहना गलत न होगा कि आज के युग में नियोजन के द्वारा ही देश का आर्थिक विकास किया जा सकता है। हम जानते है कि समुचित आँकड़ों के अभाव में कोई भी सुव्यवस्थित योजना नियोजन बनाना असम्भव है। योजना का अस्तित्व पूर्णतया ऑकड़ों पर आधारित है। वर्तमान की व्याख्या, भूतकाल की विवेचना एवं भावी अनुमानों पर ही नियोजन का सफल संचालन सम्भव है और यह सब बातें सांख्यिकी के द्वारा सम्भव होती है। जैसा कि कहा जाता है कि “समकों के बिना आर्थिक नियोजन पतवार तथा दिशासूचक यन्त्ररहित जहाज की तरह है।” भारतीय योजना आयोग ने भी इस बात को स्वीकार किया है। इसीलिये हमारी सरकार ने केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन की स्थापना की है। कुछ लोगों का विचार है कि समकों के बिना नियोजन बनाना अधेरे में चलने के समान है। इस प्रकार स्पष्ट है कि समकों के बिना आर्थिक नियोजन के लक्ष्य निश्चित करना प्रायः असम्भव है।

3. व्यवसाय तथा वाणिज्य में महत्व – व्यवसाय के विभिन्न क्षेत्रों में भी इसका पर्याप्त महत्व पाया जाता है। जिस प्रकार शासन व्यवस्था को संचालित करने के लिये सांख्यिकी की आवश्यकता होती है उसी प्रकार व्यापार, वाणिज्य एवं व्यवसाय की सफलता भी सांख्यिकी पर निर्भर होती है। व्यवसाय की सफलता के लिये उत्पादन की जाने वाली वस्तुओं की माँग का ज्ञान होना आवश्यक होता है। बाडिगटन ने ठीक ही कहा है कि “एक सफल व्यापारी वही है जिसके अनुमान वास्तविकता के बहुत निकट होते हैं। समकों का इस प्रकार वाणिज्य क क्षेत्र में विभिन्न उपयोग होता है। गुण नियन्त्रण, व्यय नियन्त्रण, विक्रय नीति व मूल्य निर्धारण में इसका उपयोग किया जाता है।” प्रबन्ध के क्षेत्र में भी सांख्यिकी का अपना एक विशेष स्थान है। प्रवन्ध के समक्ष सदैव अनिश्चितता के बीच निर्णय लेने की समस्या विद्यमान रहती है। किन्तु सांख्यिकी रीतियों में यह दक्षता पायी जाती है कि वह प्रबन्धकर्ता को निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है। इस प्रकार अनेक सांख्यिकीय यन्त्र, जैसे- सम्भावना सिद्धान्त, निदर्शन रीति, पूर्वानुमान आदि उपयोगी भूमिका अदा करते हैं। इस प्रकार व्यवसाय प्रवन्ध के विभिन्न क्षेत्रों में सांख्यिकी का उपयोग कुशलतापूर्वक किया जा सकता है। बैंक को अपने यहाँ एक सांख्यिकी विभाग रखना पड़ता है। यह विभाग व्यापार, मुद्रा की माँग में होने वाल परिवर्तनों, मुद्रा बाजार की स्थिति तथा विनियोग की सुविधायें आदि का विश्लेषण करता रहता है। इन समंकों के आधार पर नीति निर्धारण किया जाता है। बीमा व्यवसाय का प्रादुर्भाव सांख्यिकी के आधार पर हुआ है। विभिन्न आयु वाले व्यक्तियों द्वारा दी जाने वाली प्रीमियम दर मृत्यु की तालिका के आधार पर ही दी जाती है। इसी प्रकार यातायात कम्पनियों आंकड़ों के आधार पर यातायात व्यवस्था की सुविधायें, भाड़े की दर यात्रियों की सुविधाओं आदि का निर्धारण करती हैं। इसी प्रकार स्कन्ध विपणी तथा उपज विपणों में किये जाने वाले व्यवसायों पर भी समंक का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

4. सामाजिक समस्याओं में महत्त्व – सामाजिक समस्याओं के अध्ययन में भी आंकड़ों के विज्ञान को अपना एक विशेष स्थान प्राप्त है। इसके माध्यम से सामाजिक दोषों व बुराइयों जैसे-बाल विवाह, बेरोजगारी, मद्यपान, भिखारी समस्या, वेश्यावृत्ति की समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। इसके आधारों पर ही समस्याओं के स्वरूप का अनुमान लगाया जा सकता है। निर्धनता का भी इसके आधार पर पता लगाया जा सकता है। अन्त में यह कहना गलत न होगा कि समकों के आधार पर ही उपरोक्त समस्याओं का मूल्यांकन करके इसके हल निकाले जा सकते हैं। इस प्रकार सांख्यिकी सामाजिक समस्याओं के अध्ययन व निदान में विशेष उपयोगी है।

5. राजनीतिज्ञों के लिये महत्व – राजनीतिज्ञों की दृष्टि से भी सांख्यिकी का एक विशेष महत्व है। राजनीतिज्ञों का एक सामाजिक दायित्व होता है कि देश की समस्याओं का अध्ययन करना तथा उनके दूर करने के उपाय निकालना समकों की सहायता से देश में पायी जाने वाली समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। अध्ययन करने के बाद वे अपने विचार संसद या देश के समक्ष रखते हैं। इससे देश के सभी लोगों का ध्यान इन समस्याओं की ओर जाता है। सरकार भी अपना दायित्व भली-भाँति पूरा करने में सफल होती है। इसी प्रकार प्रजातन्त्र में मतदान की उचित व्यवस्था करना चुनाव क्षेत्र का चयन करना तथा सीटों के निर्धारण में समकों की सहायता ली जाती है।

6. अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का महत्व – वर्तमान समय में वैज्ञानिक रीति के रूप में सांख्यिकी तथा अर्थशास्त्र में घनिष्ठ सम्बन्ध है। आज प्रत्येक आर्थिक समस्या के अध्ययन के लिये सांख्यिकीय रीतियों का उपयोग किया जाता है या लुन चाऊ के अनुसार, “अर्थशास्त्री आर्थिक समूहों, जैसे-सकल राष्ट्रीय उत्पाद, उपभोग, बचत, विनियोग, व्यय और मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तनों को मापने के लिये समंकों पर निर्भर करते हैं। आर्थिक सिद्धान्तों की पुष्टि करने तथा परिकल्पनाओं की जाँच में भी सांख्यिकी रीतियों का प्रयोग करते हैं। वास्तव में सांख्यिकी रीतियाँ अर्थशास्त्री की अध्ययनशाला के महत्वपूर्ण यन्त्र बन गये हैं।

7. गणित में सांख्यिकी का महत्व – सांख्यिकी तथा गणित में अत्यन्त प्राचीन सम्बन्ध पाया जाता है। वास्तव में सांख्यिकी विज्ञान का स्तम्भ ही गणित पर आधारित है। सांख्यिकी को गणित की ही एक शाखा माना जाता है। गणित के सिद्धान्तों के आधार पर ही सांख्यिकी रीतियों का विकास हुआ है। इन दोनों में केवल इतना अन्तर पाया जाता है कि गणित में जिन सूत्रों को निकाला जाता है इनका उपयोग सांख्यिकी में किया जाता है। साथ ही गणित निश्चित है जबकि सांख्यिकी अनिश्चित है।

8. मौसम विज्ञान में सांख्यिकी का महत्त्व – मौसम विज्ञान के द्वारा विभिन्न स्थानों के दबाव, तापमान, वर्षा की दशा का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन सांख्यिकी रीतियों के अभाव में सम्भव नहीं हो सकता है। भविष्य में मौसम के सम्बन्ध में जानकारी भी मौसम विज्ञान से ही प्राप्त होती है जो पूर्ण रूप से समंकों पर निर्भर करती है। अतएव यह कहना गलत न होगा कि आज प्रगतिशील युग में विज्ञान का सम्बन्ध समस्त प्रधान विज्ञानों में पाया जाता है।

9. खगोलशास्त्र में सांख्यिकी का महत्त्व – खगोलशास्त्र एक ऐसा शास्त्र है जिसमें आरम्भ से ही सांख्यिकी का उपयोग होता रहा है। खगोलशास्त्री प्राचीन समय से ही ग्रहण के अध्ययन में तारों तथा नक्षत्रों की गति के सम्बन्ध में आंकड़े एकत्रित किया करते थे। जैसा कि कहा जाता है कि सांख्यिकी की न्यूनतम वर्ग रीति का अन्वेषण सर्वप्रथम खगोलशास्त्रियों ने ही किया। तत्पश्चात् प्रो. गौस ने विभ्रम का सामान्य नियम का निर्माण किया।

10. जीव विज्ञान तथा चिकित्सा विज्ञान में महत्व – जीव विज्ञान के सिद्धान्त भी सांख्यिकी रीतियों पर आधारित हैं। सर फ्रान्सिस गाल्टन ने लम्बाई के सम्बन्ध में प्रतीपगमन के अध्ययन में सांख्यिकी का उपयोग किया। इसी प्रकार कार्ल पियर्सन ने सह-सम्बन्ध विश्लेषण में उत्तराधिकार के सिद्धान्त सांख्यिकी पर बनाये। चिकित्सा विज्ञान में भी बीमारियों के कारण, प्रभाव एवं उपचारों के विश्लेषण में समंकों का सहारा लिया जाता है।

Functions of statistics / सांख्यिकी के कार्य


Statistics अत्यन्त उपयोगी विज्ञान है, क्योंकि इसके द्वारा तथ्यों के संख्यात्मक पहलू को सरल, संक्षिप्त तुलनीय एवं विश्वसनीय बनाने के कार्य किये जाते हैं। सांख्यिकी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

Statistics functions

(1) सांख्यिकी विशाल एवं जटिल तथ्यों को सरल बनाती है-बड़े और जटिल तथ्यों को सांख्यिकी रीतियों से वर्गीकृत करके, उनको सारणियों में प्रविष्ट करके तथा चित्र, बिन्दु रेखा अथवा माध्य निकालकर आसानी से समझने योग्य एवं स्मरण योग्य बनाया जा सकता है।

(2) सांख्यिकी तथ्य का तुलनात्मक अध्ययन करने में सहायक होती है – सांख्यिकी का एक विशेष कार्य तथ्यों के सापेक्ष महत्व को बताना है अतः इसके अभाव में हम वस्तुओं का उचित मूल्यांकन नहीं कर सकते हैं। किसी व्यक्ति की आय जान लेने से कोई लाभ नहीं जब तक कि हम देश में प्रति व्यक्ति आय से उसकी तुलना न करें।

(3) मनुष्य के ज्ञान अनुभव में वृद्धि करना – मनुष्य का व्यक्तिगत ज्ञान अति सीमित है, किन्तु वह ज्ञान में बातचीत द्वारा, पत्र-पत्रिकाओं को पढ़कर, विशेषज्ञों के लेखों को पढ़कर निरन्तर वृद्धि करता रहता है। वह जैसे ही इन चीजों पर विचार करता है, इनमें दिये गये संख्यात्मक तथ्यों का अध्ययन करता है।

(4) नीतियों के निर्माण में सहायता –  देश के भावी विकास की योजनाएँ सांख्यिकी तथ्यों पर ही आधारित होती हैं। पंचवर्षीय योजनाओं की क्या रूपरेखा हो, इस बात का निश्चय सांख्यिकीय ज्ञान की सहायता से ही किया जाता है।

(5) किसी घटना के महत्व का अनुमान लगाने में सहायक – उदाहरण के लिए, पंचवर्षीय योजनाओं पर होने वाले व्यय को जानकर अथवा सामुदायिक विकास योजनाओं का सांख्यिकीय अध्ययन करके ही हम निश्चित रूप से बता सकते हैं कि इन योजनाओं का राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में क्या महत्व है ?

(6) नियमों का निर्माण तथा जाँच कार्य में सहायक – किसी भी विज्ञान के नियम बनाने में सांख्यिकीय रीतियों की सहायता ली जाती है तथा सभी नियमों की जाँच सांख्यिकीय विधियों से ही की जाती है।

(7) तथ्यों के मध्य सम्बन्धों की स्थापना – सांख्यिकी का एक विशिष्ट कार्य तथ्यों के मध्य सम्बन्धों की स्थापना करना है। उदाहरण के लिए, वर्षा की मात्रा और कृषि उत्पादन के मध्य सम्बन्ध, विज्ञापन पर व्यय और विक्री के मध्य सम्बन्ध स्थापित किये जाते हैं।

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