Transformer कैसे करता है एक ट्रांसफार्मर वर्क

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Saurabh Guptahttp://karekaise.in
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आप सभी ने कभी ना कभी transformer का नाम सुना होगा पर क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश करी की क्या होता है। अगर नहीं तो आप बहुत सही जगह आए हैं आज आप इस आर्टिकल में जानेंगे कि ट्रांसफार्मर क्या होता है और यह कितने प्रकार के होते हैं। ट्रांसफार्मर का सिद्धांत, ट्रांसफार्मर का working और बहुत कुछ। तो चलिए मैं आपको विस्तार से बताता हूं कि ट्रांसफार्मर क्या होता है।

What is transformer/ ट्रांसफार्मर क्या है

एक विद्युत उपकरण(electric device) जिसमें अनिवार्य रूप से एक ही कोर पर दो या दो से अधिक वाइंडिंग घाव (windings wound)होते हैं, जो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण(electromagnetic induction) द्वारा विद्युत ऊर्जा(electrical energy) को एक या अधिक सर्किट के एक सेट से एक या अधिक सर्किट के दूसरे सेट में बदल देता है जैसे कि ऊर्जा की आवृत्ति( frequency of the energy) अपरिवर्तित रहती है जबकि वोल्टेज (voltage)और करंट(current) आमतौर पर बदलते हैं।

Transformer classification 

Transformer classification

Types of transformer/ट्रांसफार्मर के प्रकार

बिजली उत्पादन ग्रिड(power generation grid), वितरण क्षेत्र(distribution sector), पारेषण और विद्युत ऊर्जा खपत( transmission and electric energy consumption) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर का उपयोग किया जाता है। विभिन्न प्रकार के ट्रांसफार्मर होते हैं जिन्हें निम्नलिखित कारकों(factors) के आधार पर वर्गीकृत (classify)किया जाता है

Working voltage range / कार्यशील वोल्टेज रेंज।

The medium used in the core / कोर में प्रयुक्त माध्यम।

winding arrangement / घुमावदार व्यवस्था।

installation location / स्थापना स्थान।

 

 

1. Based on voltage levels / वोल्टेज स्तर के आधार पर

आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले ट्रांसफार्मर प्रकार, वोल्टेज के आधार पर उन्हें इस प्रकार वर्गीकृत (classified) किया जाता है:

a) Step up / स्टेप-अप ट्रांसफार्मर:  इनका उपयोग बिजली जनरेटर और पावर ग्रिड के बीच किया जाता है। सेकेंडरी आउटपुट वोल्टेज इनपुट वोल्टेज से अधिक होता है।

b) Step down / स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर: इन ट्रांसफॉर्मर का उपयोग हाई वोल्टेज प्राइमरी सप्लाई को लो वोल्टेज सेकेंडरी आउटपुट में बदलने के लिए किया जाता है।

2. based on the medium of the core used /प्रयुक्त कोर के माध्यम के आधार पर

एक ट्रांसफॉर्मर में, हम विभिन्न प्रकार के कोर(core) पाएंगे जिनका उपयोग किया जाता है।

a) Air core / एयर कोर ट्रांसफॉर्मर: प्राथमिक (primary)और सेकेंडरी(secondary) वाइंडिंग के बीच फ्लक्स लिंकेज(flux leakage) हवा के माध्यम से होता है। गैर-चुंबकीय पट्टी(non magnetic strip) पर कुंडल या घुमावदार घाव (coil or winding wound)।

b) Iron core /आयरन कोर ट्रांसफार्मर: वाइंडिंग एक साथ ढेर की गई कई लोहे की प्लेटों पर घाव(wound) होते हैं, जो फ्लक्स उत्पन्न करने के लिए एक आदर्श लिंकेज पथ (linkage path to generate flux) प्रदान करते हैं।

3. Based on winding arrangement / घुमावदार व्यवस्था के आधार पर

Autotransformer/ ऑटोट्रांसफॉर्मर: इसमें लेमिनेटेड कोर के ऊपर केवल एक घुमावदार घाव (winding wound) होगा। प्राथमिक और द्वितीयक एक ही कुंडल साझा (shares the same coil)करते हैं। ऑटो का अर्थ ग्रीक भाषा में “स्वयं” भी है।

4. Based on install location / स्थापित स्थान के आधार पर

a) power / पावर ट्रांसफार्मर: इसका उपयोग बिजली उत्पादन स्टेशनों पर किया जाता है क्योंकि वे उच्च वोल्टेज अनुप्रयोग ( high voltage application)के लिए उपयुक्त होते हैं

b) Distribution / वितरण ट्रांसफार्मर: ज्यादातर घरेलू उद्देश्यों के लिए वितरण लेन (distribution lanes) में उपयोग किया जाता है। वे कम वोल्टेज ले जाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इसे स्थापित करना बहुत आसान है और कम चुंबकीय नुकसान (low mangnetic loss )की विशेषता है।

c) Measurement / मापन ट्रांसफॉर्मर: इन्हें मुख्य रूप से वोल्टेज, करंट, पावर को मापने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

d) protection / सुरक्षा ट्रांसफॉर्मर: उनका उपयोग घटक सुरक्षा उद्देश्यों( component protection purpose) के लिए किया जाता है। सर्किट में, कुछ घटकों को वोल्टेज उतार-चढ़ाव( voltage fluctuations) आदि से संरक्षित किया जाना चाहिए। सुरक्षा ट्रांसफार्मर घटक सुरक्षा सुनिश्चित (ensure component protection) करते हैं।

Transformer working principle / ट्रांसफार्मर का सिद्धांत

ट्रांसफार्मर विद्युत चुम्बकीय प्रेरण ( electromagnetic induction) और पारस्परिक प्रेरण ( mutual induction) के सिद्धांत पर आधारित है।

Construction of transformer / ट्रांसफार्मर का निर्माण

ट्रांसफार्मर बनाने के लिए एक soft iron core के ऊपर copper wire से winding की जाती है soft iron core के दोनों तरफ। पहले कुंडली(coil) को primary coil कहा जाता है और दुसरे कुंडली (coil) को secondary coil कहा जाता है। primary coil में वोल्टेज इनपुट (voltage input) किया जाता है तो वही secondary coil हमें वोल्टेज आउटपुट (voltage output) मिलता है।

construction of transformer

Working of transformer /ट्रांसफार्मर का कार्य

जब primary coil में voltage input किया जाता है तो primary coil एक solenoid की तरह काम करता है। जब भी किसी solenoid में current होता है तब उस solenoid के अंदर magnetic fieldउत्पन्न होती है।soft iron core एक ferromagnetic प्रदार्थ है जो सभी magnetic field को अपने ओर आकर्षित करता है जिस कारण से primary coil से  निकलने वाली सभी magnetic field , secondary coil  से होकर गुजरती है। यहां जो current flow हो रहा है वो लगातार change होते रहता है इसलिए magnetic field भी लगातार change होती रहती है जिस कारण से secondary coil में magnetic flux change होता रहता है।

faraday law  के अनुसार magnetic flux में परिवर्तन होने के कारण secondary coil में current उत्पन्न हो जाता है।

its working formula :

Es/Ep = Ns /Np

step up: Es > Ep and  Ns > Np

step down: Es<Ep and Ns < Np

 

इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए धन्यवाद। अगर आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा तो comment करे और इस post को share  करे।

 

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